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मध्यदेषीय वैष्य महासभा रोहतास नें आवश्यक समझा कि मध्यदेषीय वैष्यों की संख्या इस जिले में पर्याप्त है परन्तु संख्या की दृषिट से इनमें शिक्षा अपर्याप्त  है अतएव एक महविधालय स्थापित किया जाय जिसमें समाज के साथ साथ इस जाति के बन्धु भी समुजित शिक्षा प्राप्त कर सकें तथा समाज के अन्य बन्धुओं के साथ इस जाति के बन्धुओं को भी  शेक्षिक सेवा का अवसर प्राप्त हो सके इस निमित मध्यदेषीय वैष्य महासभा रोहतास नें दिनांक 04.12.1983 की बैठक मे सर्व सम्मति से अपने समाज के संत महापरुष बाबा गणिनाथ के नाम पर डेयरी आन सोन में महाविधालय स्थापित करने का निर्णय लिया। इस महाविधालय का सर्व सम्मति से बाबा गणिनाथ महाविधालय नामकरण किया गया प्रारम्भ में महविधालय में इण्टरमीडियएट स्तर तक कला विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय में पढार्इ प्रारम्भ हुर्इ शर्तो की पूर्ति के पश्चात महाविधालय को 1989-90 से इण्टरमीडिएट स्तर तक मान्यता प्राप्त हुई , जिसकी अधिसूचना 9.2.1991 को बिहार इंटरमीडिएट  शिक्षा परिषद द्धारा जारी की गयीं वर्ष 1989 में महाविधालय डिहरी प्रखण्ड के अन्तर्गत ही जी . टी रोड के किनारे जमुहार में स्थानान्तरित हुआ - जहाँ महाविधालय अपने निजी भूमि और भवन में संचालित हो रहा है सम्प्रति महाविधालय का दो मंजिला पक्का भवन चहारदिवारी  के साथ निर्मित है जिसमें कुल 22 कमरे है,जिसमें  जिसमें वर्ग कक्ष की संख्या 14 है इसके अतिरिक्त प्राचार्य कक्ष कार्यालय, शिक्षक कक्ष पुस्तकाय प्रयोगषाला कामन रुम साइकिल मोटरससार्इकिल शेड , शौचालय  आदि की समुचित व्यवस्था है। पानी की व्यवस्था के लिए मोटर पम्प और जेनरेटर की व्यवस्था है

 

 

महाविधालय में डिग्री स्तर की पढार्इ वर्ष 2010-11 से प्रारम्भ हुर्इ और शर्तो की पूर्ति के पश्चात सत्र 2011-14 से महाविधालय को डिग्री स्तर तथा कला विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों संकायों में पास प्रतिष्ठा स्तर तक वीर कुँवर सिंह विष्वविधालय आरा से सम्बद्धता प्राप्त है महाविधालय के नाम से कुल 8.84 एकड भूमि निबंधित है इस प्रकार महाविधालय अपने उद्देष्यों की पुर्ति के साथ विकास के पथ पर लगातार अग्रसर है महाविधालय के संचालन एवं नियत्रण के लिए शासी निकाय गठित है जिसके अध्यक्ष गणेश प्रसाद सचिव चन्द्रिका प्रसाद गुप्ता तथा प्राचार्य प्रो0 रामेश्वेर प्रसाद है